Hindi Kavi

Just another WordPress.com weblog

क्या यही मनुज है ?

Posted by Sandesh Dixit on January 18, 2009

107
अधीर अधर पर राम प्रकट है ,
व्यथा विकट या काल निकट है

सबल हाथ ,जग सकल साथ है ,
निर्बल ही को बस जग्गंनाथ है .

जीत का अब उन्माद थका है ,
थके हार कटु स्वाद चखा है .

जब तक था माया का साया ,सहज कभी तू याद न आया ,
पर जब सूर्य ढला और तुम गहराया , ह्रदय ओअत में प्रभु नाम समाया .

भक्ति का संगीत नहीं ये दुह-वक्त की चीत्कार है ,
दे शरण कर दुख हरण ये तट नहीं मंझधार है .

धन जीवन ,मन मोह बंधन ,सखा यही बस यही अनुज है ,
आजीवन संचय में मगन ,छल लोभ स्वार्थ ,क्या यही मनुज है ?

One Response to “क्या यही मनुज है ?”

  1. mukesh said

    nice heart touching kavita

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

 
%d bloggers like this: