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हे भारत के राम जगो

Posted by Sandesh Dixit on January 17, 2009

हे भारत के राम जगो ,मैं तुम्हे जगाने आया हू ,
सो धर्मो का धर्म एक ,बलिदान बताने आया हूं ,
सुनो हिमालय कैद हुआ है ,दुश्मन की जंजीरों में
आज बता दो कितना पानी है भारत के वीरो में ,
कड़ी शत्रु की फौज द्वार पर आज तुम्हे पुकार रही ,
सोये सिंह जगो भारत के माता तुम्हे पुकार रही ,
रण की भेरी बज रही ,उठो घोर निंद्रा त्यागो ,
पहला शीश चढाने वाले ,माँ के वीर पुत्र जगो
बलिदानों के वज्र दंध पर, देश भक्त की ध्वजा जगे ,
और रण के कंकर पहने है ,वो राज सिंह की भुजा जगे II

अग्नि पंथ के पंथी जागो ,शीश हथेली पर धरकर ,
जागो रक्त ,भक्त लाल के ,जागो तन के सौदागर,
खप्पर वाली काली जागे ,जागे दुर्गा बर्बंडा ,
और रक्त बीज का रक्त चाटने वाली जागे चामुंडा ,
नर मुंडो की माला वाला ,जागे कपाली कैलाशी ,
रण की चंडी घर घर नाचे , मौत फिरे प्यासी प्यासी ,
रावन का वध स्वयं करूँगा ,कहने वाला राम जगे,
और कौरव शेष न एक बचेगा ,कहने वाला श्याम जगे ,
परुशराम का परशु जगे ,रघुनन्दन का बन जगे ,
यदुनंदन का चक्र जगे ,अर्जुन का धनुष महान जगे ,
परुशराम का परशु जगे ,पोरुष परुस महान जगे ,
और सेल्यूकस को कसने वाला ,चन्द्रगुप्त बलवान जगे II

हठी हमीर जगे ,जिसने झुकना कभी न जाना ,
जगे पदमनी का जोहर ,जागे केशरिया बना ,
देशभक्त का जीवीत झन्डा , आजादी का दीवाना ,
और रक्त प्रताप का सिंह जागे ,वो हल्दी घाटी का राना
दक्खिन वाला जगे शिवाजी .,खून शाहजी का राना ,
मरने की हठ ठाना करते ,वीर मराठो के रजा ,
छत्र शाल बुंदेला जागे ,पंजाबी कृपान जगे,
और दो दिन जिया शेर के माफिक ,वो टीपू सुलतान जगे ,
गर्वाहे का जगे मोर्चा ,जगे झाँसी की रानी ,
अहमदशाह जगे लखनऊ का ,जगे कुंवर सिंह बलिदानी ,
गर्वाहे का जगे मोर्चा ,पानीपत मैदान जगे ,
भगत सिंह की फांसी जगे ,राजगुरु के प्राण जगे II

जिसकी छोटी सी लकुटी से (बापू ),संगीने भी हार गयी
हिटलर को जीता ,वे फौजे सात समुन्द्र पर गयी ,
उस लकुटि और लंगोटी वाले बापू का बलिदान जगे ,
ये भारत देश महान जगे ,ये भारत की संतान जगे ,
आजादी की दुल्हन को जो सबसे पहले चूम गया ,
स्वयं कफ़न की गाँठ बाँधकर,सातों भंवर घूम गया ,
उस सुभाष की शान जगे ,उस सुभाष की आन जगे ,
ये भारत देश महान जगे ,ये भारत की संतान जगे II

झोली लेकर मांग रहा हू ,कोई शीश दान दे दो ,
भारत का भैरव भूखा है , कोई प्राण दान दे दो ,
खड़ी म्रत्यु की दुल्हन कुवारी ,कोई ब्याह रचा लो ,
कोई मर्द अपने नाम की चूड़ी तो पहना दो ,
कौन वीर निज ह्र्युदयरक्त से इसकी मांग भरेगा ,
कौन कफ़न का पलंग बिछा कर ,उस पर शयन करेगा ,
ओ कश्मीर हड़पने वाले ,कन खोल कर सुनतें जाना ,
भारत के सर की कीमत तो ,सिर्फ सर है ,
कोहिनूर की कीमत चाहे पांच हज़ार दीनार है,
रण के खेतो में जब छायेगा अमर म्रय्तु का सन्नाटा ,
लाशो की जब रोटी होंगी ,और बारूदों का आटा ,
सन्न सन्न करतें तीर चलेंगे ,वो माझी के तन वाला ,
जो हमसे टकराएगा ,चूर चूर हो जायेगा ,
इस मिटटी को छूने वाला, मिटटी में मिल जायेगा ,
मैं घर घर मैं इन्कलाब की आग जलाने आया हू ,
हे भारत के राम जगो ,मैं तुम्हे जगाने आया हूं II

जय भारत !!!
जय हिंद !!!

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