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आखिर कब तक …..???

Posted by Sandesh Dixit on January 17, 2009

आज फिर धमाके हुए , शहर के उस चौराहे पर ,
जहा खिखिलाती हुयी जिंदगी आज भी खड़ी थी ,
किसी बस के इन्तजार में,
और कोई आया था , कुछ खरीदने ,
अपने छोटे से संसार को खुशियों से सीचने I

वो इन्तजार में थी आज अपने इंटरव्यू के लिए ,
मन में आशा थी की आज वो नौकरी पा जायेगी ,
और जो उसकी बूढी माँ , सालो से उसको पाल रही थी ,
उसके दामन में ढेरो खुशिया भर जायेगी I

कुछ बच्चे भी खड़े थे , स्कूल के इन्तजार में ,
जिन्हें बड़े होकर इस देश का भर उठाना था ,
भारत की सभ्यता , संस्कृति को विश्व पटल तक बढ़ाना था I

कुछ ही पलो में मिटा दिया उस आवाज ने ,
उन आँखों के सपनो को , जिन्हें सालो से पाला था किसी ने ,
आज आँखों से सामने अँधेरा है ,
जो कल तक किसी का सहारा थे ,
आज सहारे की तलाश में है I

ये सपने नहीं जानते ,
किसी हिन्दू को न मुस्लमान को ,
न ये जानतें है हिंदुस्तान को , न पाकिस्तान को ,
फिर क्यों उन्हें ही चुकाना पड़ता है हर बार इस क़र्ज़ को ,
क्यों भूल जाते है वो ‘कायर’ मानवता के अपने फ़र्ज़ को ,
क्यों आतंक को हमेशा जेहाद कहा जाता है ,
क्यों धरम को इस तरह नंगा नचाया जाता है I

आखिर कब तक यू मानवता का अंत होता रहेगा ,
आखिर कब तक बूढा बाप ,बेटे के अर्थी ढोता रहेगा ,
आखिर कब तक सुहागन की चूडिया बिखरेंगी ,
आखिर कब तक बच्चों की आहें सिंसेकेंगी ,
कब तक …..
आखिर कब तक …..???

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