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आर पार हो जाने दो …..

Posted by Sandesh Dixit on December 2, 2008

मैंने देखा हैं सागर में भीगे सूरज को नहाते हुए
उसी गुम्बद पर, जहा मेरा घर था ,तारो को बतियातें हुए ,
वहां हवा भी आकर बहुत इठलाती थी
दामन में अपने ,सात समुंदर की खुशबु भर लाती थी ….

वो भारत का ‘ताज ‘ था
कहतें है ,मेरे देश की संस्कृति का आगाज था ,
इस ईमारत को पता था , न हिन्दू का ना मुस्लमान का
न इल्म था ,गीता का ना कुरान का ….

उसके पास ही हम लोगो की सुबह खिलती थी
एक नन्ही सी लड़की ,हाथो में दाने लिए रोज मिलती थी ,
बड़े चेन से हम लोग खुशिया मनाते
जरा सी आहट पर, मीलो दूर उड़ जातें
फिर वही आकर बैठ जातें , उसी लाल गुम्बद पर ….

जहाँ आज सिर्फ बारूदों के निशान सने है
हर दिशा में , सिर्फ और सिर्फ श्मशान बने है ,
आज चीख रही है दीवारे ,कोई उन्हें उनका दोष बता दे
जिस आँगन ने खून पिया ,उसे अपना रोष बता दे ….

क्या इतना ही अपराध ….वो समरस हो अपनाती गयी
मिलता रहा जो राहों में ,सबको गले लगाती गयी ,
आज वही संगीने गाढ़ चुके हैं उसके दामन में
जो खेले, पले- बढे , रहे ,उसके आँगन में …..

आज वही आतंक को ‘जेहाद’ बना कर घूम रहे
भारत माता की छाती पर ‘पाक’ ध्वजा को चूम रहे ,
आज एक बार फिर , ‘कायर’, माँ को ललकार गए है
सयंम के मन के तारो को, फिर एक बार झंकार गए है ….

सयंम बहुत हुआ अर्जुन , अब गांडीव उठा लो
विश्व पटल से ,’आतंकी देश’ का नामोनिशान मिटा दो,
बस एक बार अब , बंद तोपों का मुह खुल जाने दो
जो होगा भाग्य समर्पित , आर पार हो जाने दो …..

11 Responses to “आर पार हो जाने दो …..”

  1. रचना गौड़ भारती said

    आपने बहुत अच्छा लिखा है ।
    भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है।
    लिखते रहि‌ए लिखने वालों की मंज़िल यही है ।

  2. स्वागत है आपका। लिखते रहें

  3. anamika said

    HUM AA RAHE HAI

    BACH LO HUM SE
    BACH SAKO THO

    KYUNKI…………
    TUMNE KI HAI SHURUWAT
    KHATMA KARNE HUM AA RAHE HAI

    ABHI NAHI PONCHA HAI
    USNE APNE MAANG KA SINDOOR
    BACH LO HUM SE
    BACH SAKO THO
    USKE PATI KI CHITA KO
    AGNI DENE
    HUM AA RAHE HAI.

    ABHI NAHI LAGAYA HUMNE
    MARHAM APNE GHAAWON PE
    BACH LO HUM SE
    BACH SAKO THO
    TUMNE DIYE JO GHAAW
    USSE LAUTANE
    HUM AA RAHE HAI

    ABHI NAHI BAHAYE AANSU
    USNE APNE BETE KI CHITA PAR
    BACH LO HUM SE
    BACH SAKO THO
    USKI AATMA KO SHANTI DENE
    HUM AA RAHE HAI

    ABHI NAHI PONCH HAI KHUN
    NA SUKANE DIYA HAI USSE
    BACH LO HUM SE
    BACH SAKO THO
    HAR KATARE KA JAWAB DENE
    HUM AA RAHE HAI

    TUM KAUN HO
    HAMARI ZINDAGI KA
    FAISALA KARNE WALE
    TUMHARA AAKHARI
    FAISALA KARNE
    HUM AA RAHE HAI

    HUM HAI
    BHARAT HI SAU KAROD JANATA
    TUMHE TUMHARI
    GITANATI KARWANE
    HUM AA RAHE HAI

  4. आपका चिठ्ठाजगत में हार्दिक स्वागत है, खूब लिखें, हमारी शुभकामनायें आपके साथ हैं… धन्यवाद…

  5. Rishabh said

    Sir,
    Kavita ne Naya Josh Bhar Diya

  6. Neeraj said

    Sir,

    These are strong statement by a Kalam-veer but very much true to the burning sentiments of bleeding hearts.

    Thanx…

  7. Tanu Shree said

    is kavita ko padh ke naya junoon jaag utha

  8. anita said

    aap ne bhot acha likha hai ye baaben pad kar such main kaffi desh ke liye aur bhi bhavana jag gai hai aur un aatankiyon ke khilaf jada nafrat ho gai h

  9. rishyant said

    Its realy nice sir or and 3&4 pargraph i liked very much.

  10. sweta said

    एक कलम का सिपाही फिर से पैदा हो गया, बहुत ही उत्तम रचना हैं.

  11. randhirsinghsohal said

    it touches the heart

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