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कैसे भूलू

Posted by Sandesh Dixit on January 18, 2009

forget
कैसे भूलू , वो नैनो की भाषा ,वो चंचल अभिलाषा
वो तेरा शरमाना,आँखे झुका के यू मुस्काना
फिर कान में आकर धीरे से कहना , की तुम्हे मोहब्बत है
तुम्ही बतलाओ मुझे ….कैसे भूलू

कैसे भूलू ,जब तेरे कदमो की आहट से मेरा दिल दहलता था
तेरी एक नज़र के लीए वो इस तरह मचलता था
हर हवा में तेरी खुशबु ,हर फिजा में तेरे नज़ारे ,शायद वक़्त भी तेरे इशारे पे चलता था
कैसे भूलू उस खुशबु को जो आज भी मेरी सांसो में बसती है
तुम्ही बतलाओ मुझे ….कैसे भूलू

कैसे भूलू बारिस की उन बूंदों को ,जो आज भी तेरे प्यार में भिगोती है
उन फूलो की पंखुडियों को .जो डायरी के पन्ने आज भी सजोती है
कैसे भूलू , तेरे सुर्ख होठो से सने खतो को , जो आज भी तेरे होने की गवाही देते है
इन एहसासों से भरी यादो को कैसे भूलू
तुम्ही बतलाओ मुझे …. कैसे भूलू ..कैसे भूलू

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